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मंगलवार, 14 दिसंबर 2021

गोपाल सहस्रनाम स्तोत्र - Gopal Sheshastra Stotra in Sanskrit


Gopal Sheshastra Stotra in Sanskrit


 पार्वत्युवाच- 


कैलासशिखरे रम्ये गौरी पृच्छति शंकरम्‌। 


ब्रह्माण्डाखिलनाथस्त्वं सृष्टिसंहारकारकः॥1॥ 


त्वमेव पूज्यसेलौकै र्ब्रह्मविष्णुसुरादिभिः। 


नित्यं पठसि देवेश कस्य स्तोत्रं महेश्वरः॥2॥ 


आश्चर्यमिदमत्यन्तं जायते मम शंकर। 


तत्प्राणेश महाप्राज्ञ संशयं छिन्धि शंकर॥3॥ 


श्री महादेव उवाच- 


धन्यासि कृतपुण्यासि पार्वति प्राणवल्लभे। 


रहस्यातिरहस्यं च यत्पृच्छसि वरानने॥4॥ 


स्त्रीस्वभावान्महादेवि पुनस्त्वं परिपृच्छसि। 


गोपनीयं गोपनीयं गोपनीयं प्रयत्नतः॥5॥ 


दत्ते च सिद्धिहानिः स्यात्तस्माद्यत्नेन गोपयेत्‌। 


इदं रहस्यं परमं पुरुषार्थप्रदायकम्‌॥6॥ 


धनरत्नौघमाणिक्यं तुरंगं गजादिकम्‌। 


ददाति स्मरणादेव महामोक्षप्रदायकम्‌॥7॥ 


तत्तेऽहं संप्रवक्ष्यामि श्रृणुष्वावहिता प्रिये। 


योऽसौ निरंजनो देवश्चित्स्वरूपी जनार्दनः॥8॥ 


संसारसागरोत्तारकारणाय सदा नृणाम्‌। 


श्रीरंगादिकरूपेण त्रैलोक्यं व्याप्य तिष्ठति॥9॥ 


ततो लोका महामूढा विष्णुभक्तिविवर्जिताः। 


निश्चयं नाधिगच्छन्ति पुनर्नारायणो हरिः॥10॥ 


निरंजनो निराकारो भक्तानां प्रीतिकामदः। 


वृदावनविहाराय गोपालं रूपमुद्वहन्‌॥11॥ 


मुरलीवादनाधारी राधायै प्रीतिमावहन्‌। 


अंशांशेभ्यः समुन्मील्य पूर्णरूपकलायुतः॥12॥ 


श्रीकृष्णचन्द्रो भगवान्नन्दगोपवरोद्यतः। 


धरिणीरूपिणी माता यशोदानन्ददायिनी॥13॥ 


द्वाभ्यां प्रायाचितो नाथो देवक्यां वसुदेवतः। 


ब्रह्मणाऽभ्यर्थितो देवो देवैरपि सुरेश्वरि॥14॥ 


जातोऽवन्यां मुकुन्दोऽपि मुरलीवेदरेचिका। 


तयासार्द्ध वचःकृत्वा ततो जातो महीतले॥15॥ 


संसारसारसर्वस्वं श्यामलं महदुज्ज्वलम्‌। 


एतज्ज्योतिरहं वेद्यं चिन्तयामि सनातनम्‌॥16॥ 


गौरतेजो बिना यस्तु श्यामतैजः समर्चयेत्‌। 


जपेद्वा ध्यायते वापि स भवेत्पातकी शिवे॥17॥ 


स ब्रह्महासुरापी च स्वर्णस्तेयी च पंचमः। 


एतैर्दोषैर्विलिप्ये तेजोभेदान्महेश्वरि।18॥ 


तस्माज्ज्योतिरभूद्द्वेधा राधामाधवरूपकम्‌। 


तस्मादिदं महादेवि गोपालेनैव भाषितम्‌॥19॥ 


दुर्वाससो मुनेर्मोहे कार्तिक्यां रासमण्डले। 


ततः पृष्टवती राधा सन्देहं भेदमात्मनः॥20॥ 


निरंजनात्समुत्पन्नं मयाऽधीतं जगन्मयि। 


श्रीकृष्णेन ततः प्रोक्तं राधायै नारदाय च॥21॥ 


ततो नारदतः सर्व विरला वैष्णवास्तथा। 


कलौ जानन्ति देवेशि गोपनीयं प्रयत्नतः॥22॥ 


शठाय कृपणायाथ दाम्भिकाय सुरेश्वरि।


ब्रह्महत्यामवाप्नोति तस्माद्यत्नेन गोपयेत्‌॥23॥

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Sita Ram Ashtakam in Sanskrit - सीताराम अष्टकम्

 

Sita Ram Ashtakam



ब्रह्ममहेन्द्रसुरेन्द्रमरुद्गणरूद्रमुनीन्द्रगणैरतिरम्यं क्षीरसरित्पतितीरमुपेत्य नुतं हि सतामवितारमुदारम् ।


भूमिभरप्रशमार्थमथ प्रथितप्रकटीकृतचिद्घनमूर्तिं त्वां भजतो रघुनन्दन देहि दयाघन मे स्वपदाम्बुजदास्यम् ।।1।।


पद्मदलायतलोचन हे रघुवंशविभूषण देव दयालो निर्मलनीरदनीलतनोऽखिललोकह्रदम्बुजभासक भानो ।


कोमलगात्र पवित्रपदाब्जरज: कणपावितगौतमकान्त । त्वां. ।।2।।


पूर्ण परात्पर पालय मामतिदीनमनाथमनन्तसुखाब्धे प्राव्रडदभ्रतडित्सुमनोहरपीतवराम्बर राम नमस्ते ।


कामविभञ्जन कान्ततरानन काञ्चनभूषण रत्नकिरीट । त्वां. ।।3।।


दिव्यशरच्छशिकान्तिहरोज्ज्वलमौक्तिकमालविशालसुमौले कोटिरविप्रभ चारूचरित्रपवित्र विचित्रधनु:शरपाणे ।


चंडमहाभुजदण्डविखण्डितराक्षसराजमहागजदण्डं । त्वां. ।।4।।


दोषविहिंस्त्रभुजंगसहस्त्रसुरोषमहानलकीलकलापे जन्मजरामरणोर्मिमये मदमन्मथनक्रविचक्रभवाब्धौ ।


दुःखनिधौ च चिरं पतितं कृपयाध समुद्धर राम ततो मां । त्वां. ।।5।।


संसृतिघोरमदोत्कटकुञ्जरतृट्क्षुदनीरदपिण्डिततुंडं दण्डकरोन्मथितं च रजस्तम उन्मदमोहपदोज्झितमार्तम् ।


दीनमनन्यगतिं कृपणं शरणागतमाशु विमोचय मूढ़ं । त्वां. ।।6।।


जन्मशतार्जितपापसमन्वितह्रत्कमले पतिते पशुकल्पे हे रघुवीर महारणधीर दयां कुरु मय्यतिमन्दमनीषे ।


त्वं जननी भगिनी च पिता मम तावदसि त्ववितापि कृपालो । त्वां. ।।7।।


त्वां तु दयालुमकिञ्चनवत्सलमुत्पलहारमपारमुदारं राम विहाय कमन्यमनामयमीश जनं शरणं ननु यायाम् ।


त्वत्पदपद्ममत: श्रितमेव मुदा खलु देव सदाव ससीत । त्वां. ।।8।।


य: करुणामृतसिन्धुरनाथजनोत्तमबन्धुरजोत्तमकारी भक्तभयोर्मिभवाब्धितरि: सरयूतटिनीतटचारुविहारी ।


तस्य रघुप्रवरस्य निरन्तरमष्टकमेतदनिष्टहरं वै यस्तु पठेदमर: स नरो लभतेऽच्युतरामपदाम्बुजदास्यम् ।।9।।

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रविवार, 24 अक्तूबर 2021

Khatu Shyam Chalisa Lyrics: श्री खाटू श्याम चालीसा - श्री गुरु चरणन ध्यान धर

Khatu Shyam Chalisa Lyrics


 दोहा


श्री गुरु चरणन ध्यान धर, सुमीर सच्चिदानंद।


श्याम चालीसा बणत है, रच चौपाई छंद।


श्याम-श्याम भजि बारंबारा। सहज ही हो भवसागर पारा।


इन सम देव न दूजा कोई। दिन दयालु न दाता होई।।


भीम सुपुत्र अहिलावाती जाया। कही भीम का पौत्र कहलाया।


यह सब कथा कही कल्पांतर। तनिक न मानो इसमें अंतर।।

बर्बरीक विष्णु अवतारा। भक्तन हेतु मनुज तन धारा।


बासुदेव देवकी प्यारे। जसुमति मैया नंद दुलारे।।


मधुसूदन गोपाल मुरारी। वृजकिशोर गोवर्धन धारी।


सियाराम श्री हरि गोबिंदा। दिनपाल श्री बाल मुकुंदा।।


दामोदर रण छोड़ बिहारी। नाथ द्वारिकाधीश खरारी।


राधाबल्लभ रुक्मणि कंता। गोपी बल्लभ कंस हनंता।।

मनमोहन चित चोर कहाए। माखन चोरि-चारि कर खाए।


मुरलीधर यदुपति घनश्यामा। कृष्ण पतित पावन अभिरामा।।


मायापति लक्ष्मीपति ईशा। पुरुषोत्तम केशव जगदीशा।


विश्वपति जय भुवन पसारा। दीनबंधु भक्तन रखवारा।।


प्रभु का भेद न कोई पाया। शेष महेश थके मुनिराया।


नारद शारद ऋषि योगिंदरर। श्याम-श्याम सब रटत निरंतर।।

कवि कोदी करी कनन गिनंता। नाम अपार अथाह अनंता।


हर सृष्टी हर सुग में भाई। ये अवतार भक्त सुखदाई।।


ह्रदय माहि करि देखु विचारा। श्याम भजे तो हो निस्तारा।


कौर पढ़ावत गणिका तारी। भीलनी की भक्ति बलिहारी।।


सती अहिल्या गौतम नारी। भई श्रापवश शिला दुलारी।


श्याम चरण रज चित लाई। पहुंची पति लोक में जाही।।

अजामिल अरु सदन कसाई। नाम प्रताप परम गति पाई।


जाके श्याम नाम अधारा। सुख लहहि दुःख दूर हो सारा।।


श्याम सलोवन है अति सुंदर। मोर मुकुट सिर तन पीतांबर।


गले बैजंती माल सुहाई। छवि अनूप भक्तन मान भाई।।


श्याम-श्याम सुमिरहु दिन-राती। श्याम दुपहरि कर परभाती।


श्याम सारथी जिस रथ के। रोड़े दूर होए उस पथ के।।

श्याम भक्त न कही पर हारा। भीर परि तब श्याम पुकारा।


रसना श्याम नाम रस पी ले। जी ले श्याम नाम के ही ले।।


संसारी सुख भोग मिलेगा। अंत श्याम सुख योग मिलेगा।


श्याम प्रभु हैं तन के काले। मन के गोरे भोले-भाले।।


श्याम संत भक्तन हितकारी। रोग-दोष अध नाशे भारी।


प्रेम सहित जब नाम पुकारा। भक्त लगत श्याम को प्यारा।।

खाटू में हैं मथुरावासी। पारब्रह्म पूर्ण अविनाशी।


सुधा तान भरि मुरली बजाई। चहु दिशि जहां सुनी पाई।।


वृद्ध-बाल जेते नारि नर। मुग्ध भये सुनि बंशी स्वर।


हड़बड़ कर सब पहुंचे जाई। खाटू में जहां श्याम कन्हाई।।


जिसने श्याम स्वरूप निहारा। भव भय से पाया छुटकारा।


दोहा


श्याम सलोने संवारे, बर्बरीक तनुधार।

इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार।।

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Param Pita Ki Hum Stuti Gaye Lyrics in Hindi - परम पिता की हम स्तुति गायें


Param Pita Ki Hum Stuti Gaye Lyrics in Hindi


परम पिता की हम स्तुति गायें,


वही है जो बचाता हमें,


सारे पापों को करता क्षमा,


सारे रोगों को करता चंगा |


धन्यवाद दें उसके आंगनो में,


आनंद से आएं उसके चरनों में,


संग गीत गा कर ख़ुशी से


मुक्ति की चट्टान की जय ललकारें |


वही हमारा है परम पिता,


तरस खता है सर्व सदा,


पूरब से पश्चिम है जितनी दूर 


उतनी ही दूर किये हमारे कुसूर |

 

माँ की तरह उसने दी, तसल्ली 


दुनिया के खतरों में छोड़ा नहीं,


खालिस दूध कलाम का दिया 


और दी हमेशा की ज़िन्दगी |

 

चरवाहे की मानिंद ढूंढा उसने,


पापों की कीच से निकाला हमें,


हम को बचाने को जान अपनी दी 


ताकि हाथ में हम उसके रहें |

 

घोंसले को बार-बार तोड़कर उसने 


चाहा की सीखें हम उड़ना उससे,


परों पर उठाया उकाब की तरह 


ताकि हम को चोट न लगें|

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Kare Bhagat Ho Aarti Mai Doi Biriya Lyrics - करे भगत हो आरती, माई दोई बिरियाँ


Kare Bhagat Ho Aarti Mai Doi Biriya Lyrics



Kare Bhagat Ho Aarti Mai Doi Biriya Lyrics


करे भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।

श्लोक – सदा भवानी दाहिनी,

सनमुख रहे गणेश,

पाँच देव रक्षा करे,

ब्रम्हा विष्णु महेश।


करे भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।


सोने का लोटा गंगाजल पानी,

माई दोई बिरियाँ,

अतर चढ़े दो दो सिसिया,

माई दोई बिरियाँ,

करें भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।


लाये लदन वन से फुलवारी,

माई दोई बिरियाँ,

हार बनाये चुन चुन कलिया,

माई दोई बिरियाँ,

करें भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।


पान सुपारी मैया ध्वजा नारियल,

दोई बिरियाँ,

धुप कपूर चढ़े चुनिया,

माई दोई बिरियाँ,

करें भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।


लाल वरण सिंगार करे,

माई दोई बिरियाँ,

मेवा खीर सजी थरिया,

माई दोई बिरियाँ,

करें भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।


पांच भगत मिल जस तोरे गावे,

माई दोई बिरियाँ,

काटो विपत की भई जरिया,

माई दोई बिरियाँ,

करे भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।

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रविवार, 17 अक्तूबर 2021

Ramayan ke 10 Chamatkari Dohe - रामचरित मानस के दोहे

Ramayan ke 10 Chamatkari Dohe


नवरात्रि में देवी के वि‍भिन्न रूपों की अर्चना की जाकर इच्छापूर्ति हेतु मंत्र प्रयोग किए जाते हैं। जो सर्वसाधारण के लिए थोड़े क्लिष्ट पड़ते हैं। रामचरित मानस के दोहे, चौपाई और सोरठा से इच्‍छापूर्ति की जाती है, जो अपेक्षाकृत सरल है। रामचरितमानस के


10 चमत्कारी दोहे, जो देते हैं हर तरह के वरदान :


(1) मनोकामना पूर्ति एवं सर्वबाधा निवारण हेतु-


'कवन सो काज कठिन जग माही।

जो नहीं होइ तात तुम पाहीं।।'


(2) भय व संशय निवृ‍‍त्ति के लिए-


'रामकथा सुन्दर कर तारी।

संशय बिहग उड़व निहारी।।'


(3) अनजान स्थान पर भय के लिए मंत्र पढ़कर रक्षारेखा खींचे-

'मामभिरक्षय रघुकुल नायक।

धृतवर चाप रुचिर कर सायक।।'


(4) भगवान राम की शरण प्राप्ति हेतु-


'सुनि प्रभु वचन हरष हनुमाना।

सरनागत बच्छल भगवाना।।'


(5) विपत्ति नाश के लिए-


'राजीव नयन धरें धनु सायक।

भगत बिपति भंजन सुखदायक।।'


(6) रोग तथा उपद्रवों की शांति हेतु-


'दैहिक दैविक भौतिक तापा।

राम राज नहिं काहुहिं ब्यापा।।'


(7) आजीविका प्राप्ति या वृद्धि हेतु-


'बिस्व भरन पोषन कर जोई।

ताकर नाम भरत अस होई।।'


(8) विद्या प्राप्ति के लिए-


'गुरु गृह गए पढ़न रघुराई।

अल्पकाल विद्या सब आई।।'


(9) संपत्ति प्राप्ति के लिए-

'जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं।

सुख संपत्ति नानाविधि पावहिं।।'


(10) शत्रु नाश के लिए-


'बयरू न कर काहू सन कोई।

रामप्रताप विषमता खोई।।'


आवश्यकता के अनुरूप कोई मंत्र लेकर एक माला जपें तथा एक माला का हवन करें। जप के पहले श्री हनुमान चालीसा का पाठ कर लें तो शुभ रहेगा। जब तक कार्य पूरा न हो, तब तक एक माला (तुलसी की) नित्य जपें। यदि सम्पुट में इनका प्रयोग करें तो शीघ्र तथा निश्चित कार्यसिद्धि होगी। नवरात्रि में एक दिन सुंदरकांड अवश्य करें।

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Shri Krishna ke 108 Naam With Meaning - भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम और उनके अर्थ

Shri Krishna ke 108 Naam With Meaning


सौभाग्य, ऐश्वर्य, यश, कीर्ति, पराक्रम और अपार वैभव के लिए भगवान श्रीकृष्ण के नामों का जाप किया जाता है।

भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम और उनके अर्थ


1. अचला : भगवान।

2. अच्युत : अचूक प्रभु या जिसने कभी भूल न की हो।

3. अद्भुतह : अद्भुत प्रभु।

4. आदिदेव : देवताओं के स्वामी।

5. अदित्या : देवी अदिति के पुत्र।

6. अजन्मा : जिनकी शक्ति असीम और अनंत हो।

7. अजया : जीवन और मृत्यु के विजेता।

8. अक्षरा : अविनाशी प्रभु।

9. अमृत : अमृत जैसा स्वरूप वाले।

10. अनादिह : सर्वप्रथम हैं जो।

11. आनंद सागर : कृपा करने वाले।

12. अनंता : अंतहीन देव।

13. अनंतजीत : हमेशा विजयी होने वाले।

14. अनया : जिनका कोई स्वामी न हो।

15. अनिरुद्धा : जिनका अवरोध न किया जा सके।

16. अपराजित : जिन्हें हराया न जा सके।

17. अव्युक्ता : माणभ की तरह स्पष्ट।

18. बाल गोपाल : भगवान कृष्ण का बाल रूप।

19. बलि : सर्वशक्तिमान।

20. चतुर्भुज : चार भुजाओं वाले प्रभु।

21. दानवेंद्रो : वरदान देने वाले।

22. दयालु : करुणा के भंडार।

23. दयानिधि : सब पर दया करने वाले।

24. देवाधिदेव : देवों के देव।

25. देवकीनंदन : देवकी के लाल (पुत्र)।

26. देवेश : ईश्वरों के भी ईश्वर।

27. धर्माध्यक्ष : धर्म के स्वामी।

28. द्वारकाधीश : द्वारका के अधिपति।

29. गोपाल : ग्वालों के साथ खेलने वाले।

30. गोपालप्रिया : ग्वालों के प्रिय।

31. गोविंदा : गाय, प्रकृति, भूमि को चाहने वाले।

32. ज्ञानेश्वर : ज्ञान के भगवान।

33. हरि : प्रकृति के देवता।

34. हिरण्यगर्भा : सबसे शक्तिशाली प्रजापति।

35. ऋषिकेश : सभी इन्द्रियों के दाता।

36. जगद्गुरु : ब्रह्मांड के गुरु। 

37. जगदीशा : सभी के रक्षक।

38. जगन्नाथ : ब्रह्मांड के ईश्वर।

39. जनार्धना : सभी को वरदान देने वाले।

40. जयंतह : सभी दुश्मनों को पराजित करने वाले।

41. ज्योतिरादित्या : जिनमें सूर्य की चमक है।

42. कमलनाथ : देवी लक्ष्मी के प्रभु। 

43. कमलनयन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।

44. कामसांतक : कंस का वध करने वाले।

45. कंजलोचन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।

46. केशव : लंबे, काले उलझा ताले जिसने। 

47. कृष्ण : सांवले रंग वाले।

48. लक्ष्मीकांत : देवी लक्ष्मी के देवता। 

49. लोकाध्यक्ष : तीनों लोक के स्वामी।

50. मदन : प्रेम के प्रतीक।

51. माधव : ज्ञान के भंडार।

52. मधुसूदन : मधु-दानवों का वध करने वाले।

53. महेन्द्र : इन्द्र के स्वामी।

54. मनमोहन : सबका मन मोह लेने वाले।

55. मनोहर : बहुत ही सुंदर रूप-रंग वाले प्रभु।

56. मयूर : मुकुट पर मोरपंख धारण करने वाले भगवान।

57. मोहन : सभी को आकर्षित करने वाले।

58. मुरली : बांसुरी बजाने वाले प्रभु।

59. मुरलीधर : मुरली धारण करने वाले।

60. मुरली मनोहर : मुरली बजाकर मोहने वाले।

61. नंदगोपाल : नंद बाबा के पुत्र।

62. नारायन : सबको शरण में लेने वाले।

63. निरंजन : सर्वोत्तम।

64. निर्गुण : जिनमें कोई अवगुण नहीं।

65. पद्महस्ता : जिनके कमल की तरह हाथ हैं।

66. पद्मनाभ : जिनकी कमल के आकार की नाभि हो।

67. परब्रह्मन : परम सत्य।

68. परमात्मा : सभी प्राणियों के प्रभु।

69. परम पुरुष : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले।

70. पार्थसारथी : अर्जुन के सारथी।

71. प्रजापति : सभी प्राणियों के नाथ।

72. पुण्य : निर्मल व्यक्तित्व।

73. पुरुषोत्तम : उत्तम पुरुष।

74. रविलोचन : सूर्य जिनका नेत्र है।

75. सहस्राकाश : हजार आंख वाले प्रभु।

76. सहस्रजीत : हजारों को जीतने वाले।

77. सहस्रपात : जिनके हजारों पैर हों।

78. साक्षी : समस्त देवों के गवाह।

79. सनातन : जिनका कभी अंत न हो।

80. सर्वजन : सब कुछ जानने वाले।

81. सर्वपालक : सभी का पालन करने वाले।

82. सर्वेश्वर : समस्त देवों से ऊंचे।

83. सत्य वचन : सत्य कहने वाले।

84. सत्यव्त : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले देव।

85. शंतह : शांत भाव वाले।

86. श्रेष्ठ : महान।

87. श्रीकांत : अद्भुत सौंदर्य के स्वामी।

88. श्याम : जिनका रंग सांवला हो।

89. श्यामसुंदर : सांवले रंग में भी सुंदर दिखने वाले।

90. सुदर्शन : रूपवान।

91. सुमेध : सर्वज्ञानी।

92. सुरेशम : सभी जीव-जंतुओं के देव।

93. स्वर्गपति : स्वर्ग के राजा।

94. त्रिविक्रमा : तीनों लोकों के विजेता।

95. उपेन्द्र : इन्द्र के भाई।

96. वैकुंठनाथ : स्वर्ग के रहने वाले।

97. वर्धमानह : जिनका कोई आकार न हो।

98. वासुदेव : सभी जगह विद्यमान रहने वाले।

99. विष्णु : भगवान विष्णु के स्वरूप।

100. विश्वदक्शिनह : निपुण और कुशल।

101. विश्वकर्मा : ब्रह्मांड के निर्माता।

102. विश्वमूर्ति : पूरे ब्रह्मांड का रूप।

103. विश्वरूपा : ब्रह्मांड हित के लिए रूप धारण करने वाले।

104. विश्वात्मा : ब्रह्मांड की आत्मा।

105. वृषपर्व : धर्म के भगवान।

106. यदवेंद्रा : यादव वंश के मुखिया।

107. योगि : प्रमुख गुरु।

108. योगिनाम्पति : योगियों के स्वामी।

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