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रविवार, 24 अक्तूबर 2021

Khatu Shyam Chalisa Lyrics: श्री खाटू श्याम चालीसा - श्री गुरु चरणन ध्यान धर

Khatu Shyam Chalisa Lyrics


 दोहा


श्री गुरु चरणन ध्यान धर, सुमीर सच्चिदानंद।


श्याम चालीसा बणत है, रच चौपाई छंद।


श्याम-श्याम भजि बारंबारा। सहज ही हो भवसागर पारा।


इन सम देव न दूजा कोई। दिन दयालु न दाता होई।।


भीम सुपुत्र अहिलावाती जाया। कही भीम का पौत्र कहलाया।


यह सब कथा कही कल्पांतर। तनिक न मानो इसमें अंतर।।

बर्बरीक विष्णु अवतारा। भक्तन हेतु मनुज तन धारा।


बासुदेव देवकी प्यारे। जसुमति मैया नंद दुलारे।।


मधुसूदन गोपाल मुरारी। वृजकिशोर गोवर्धन धारी।


सियाराम श्री हरि गोबिंदा। दिनपाल श्री बाल मुकुंदा।।


दामोदर रण छोड़ बिहारी। नाथ द्वारिकाधीश खरारी।


राधाबल्लभ रुक्मणि कंता। गोपी बल्लभ कंस हनंता।।

मनमोहन चित चोर कहाए। माखन चोरि-चारि कर खाए।


मुरलीधर यदुपति घनश्यामा। कृष्ण पतित पावन अभिरामा।।


मायापति लक्ष्मीपति ईशा। पुरुषोत्तम केशव जगदीशा।


विश्वपति जय भुवन पसारा। दीनबंधु भक्तन रखवारा।।


प्रभु का भेद न कोई पाया। शेष महेश थके मुनिराया।


नारद शारद ऋषि योगिंदरर। श्याम-श्याम सब रटत निरंतर।।

कवि कोदी करी कनन गिनंता। नाम अपार अथाह अनंता।


हर सृष्टी हर सुग में भाई। ये अवतार भक्त सुखदाई।।


ह्रदय माहि करि देखु विचारा। श्याम भजे तो हो निस्तारा।


कौर पढ़ावत गणिका तारी। भीलनी की भक्ति बलिहारी।।


सती अहिल्या गौतम नारी। भई श्रापवश शिला दुलारी।


श्याम चरण रज चित लाई। पहुंची पति लोक में जाही।।

अजामिल अरु सदन कसाई। नाम प्रताप परम गति पाई।


जाके श्याम नाम अधारा। सुख लहहि दुःख दूर हो सारा।।


श्याम सलोवन है अति सुंदर। मोर मुकुट सिर तन पीतांबर।


गले बैजंती माल सुहाई। छवि अनूप भक्तन मान भाई।।


श्याम-श्याम सुमिरहु दिन-राती। श्याम दुपहरि कर परभाती।


श्याम सारथी जिस रथ के। रोड़े दूर होए उस पथ के।।

श्याम भक्त न कही पर हारा। भीर परि तब श्याम पुकारा।


रसना श्याम नाम रस पी ले। जी ले श्याम नाम के ही ले।।


संसारी सुख भोग मिलेगा। अंत श्याम सुख योग मिलेगा।


श्याम प्रभु हैं तन के काले। मन के गोरे भोले-भाले।।


श्याम संत भक्तन हितकारी। रोग-दोष अध नाशे भारी।


प्रेम सहित जब नाम पुकारा। भक्त लगत श्याम को प्यारा।।

खाटू में हैं मथुरावासी। पारब्रह्म पूर्ण अविनाशी।


सुधा तान भरि मुरली बजाई। चहु दिशि जहां सुनी पाई।।


वृद्ध-बाल जेते नारि नर। मुग्ध भये सुनि बंशी स्वर।


हड़बड़ कर सब पहुंचे जाई। खाटू में जहां श्याम कन्हाई।।


जिसने श्याम स्वरूप निहारा। भव भय से पाया छुटकारा।


दोहा


श्याम सलोने संवारे, बर्बरीक तनुधार।

इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार।।

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Param Pita Ki Hum Stuti Gaye Lyrics in Hindi - परम पिता की हम स्तुति गायें


Param Pita Ki Hum Stuti Gaye Lyrics in Hindi


परम पिता की हम स्तुति गायें,


वही है जो बचाता हमें,


सारे पापों को करता क्षमा,


सारे रोगों को करता चंगा |


धन्यवाद दें उसके आंगनो में,


आनंद से आएं उसके चरनों में,


संग गीत गा कर ख़ुशी से


मुक्ति की चट्टान की जय ललकारें |


वही हमारा है परम पिता,


तरस खता है सर्व सदा,


पूरब से पश्चिम है जितनी दूर 


उतनी ही दूर किये हमारे कुसूर |

 

माँ की तरह उसने दी, तसल्ली 


दुनिया के खतरों में छोड़ा नहीं,


खालिस दूध कलाम का दिया 


और दी हमेशा की ज़िन्दगी |

 

चरवाहे की मानिंद ढूंढा उसने,


पापों की कीच से निकाला हमें,


हम को बचाने को जान अपनी दी 


ताकि हाथ में हम उसके रहें |

 

घोंसले को बार-बार तोड़कर उसने 


चाहा की सीखें हम उड़ना उससे,


परों पर उठाया उकाब की तरह 


ताकि हम को चोट न लगें|

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Kare Bhagat Ho Aarti Mai Doi Biriya Lyrics - करे भगत हो आरती, माई दोई बिरियाँ


Kare Bhagat Ho Aarti Mai Doi Biriya Lyrics



Kare Bhagat Ho Aarti Mai Doi Biriya Lyrics


करे भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।

श्लोक – सदा भवानी दाहिनी,

सनमुख रहे गणेश,

पाँच देव रक्षा करे,

ब्रम्हा विष्णु महेश।


करे भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।


सोने का लोटा गंगाजल पानी,

माई दोई बिरियाँ,

अतर चढ़े दो दो सिसिया,

माई दोई बिरियाँ,

करें भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।


लाये लदन वन से फुलवारी,

माई दोई बिरियाँ,

हार बनाये चुन चुन कलिया,

माई दोई बिरियाँ,

करें भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।


पान सुपारी मैया ध्वजा नारियल,

दोई बिरियाँ,

धुप कपूर चढ़े चुनिया,

माई दोई बिरियाँ,

करें भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।


लाल वरण सिंगार करे,

माई दोई बिरियाँ,

मेवा खीर सजी थरिया,

माई दोई बिरियाँ,

करें भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।


पांच भगत मिल जस तोरे गावे,

माई दोई बिरियाँ,

काटो विपत की भई जरिया,

माई दोई बिरियाँ,

करे भगत हो आरती,

माई दोई बिरियाँ।।

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रविवार, 17 अक्तूबर 2021

Ramayan ke 10 Chamatkari Dohe - रामचरित मानस के दोहे

Ramayan ke 10 Chamatkari Dohe


नवरात्रि में देवी के वि‍भिन्न रूपों की अर्चना की जाकर इच्छापूर्ति हेतु मंत्र प्रयोग किए जाते हैं। जो सर्वसाधारण के लिए थोड़े क्लिष्ट पड़ते हैं। रामचरित मानस के दोहे, चौपाई और सोरठा से इच्‍छापूर्ति की जाती है, जो अपेक्षाकृत सरल है। रामचरितमानस के


10 चमत्कारी दोहे, जो देते हैं हर तरह के वरदान :


(1) मनोकामना पूर्ति एवं सर्वबाधा निवारण हेतु-


'कवन सो काज कठिन जग माही।

जो नहीं होइ तात तुम पाहीं।।'


(2) भय व संशय निवृ‍‍त्ति के लिए-


'रामकथा सुन्दर कर तारी।

संशय बिहग उड़व निहारी।।'


(3) अनजान स्थान पर भय के लिए मंत्र पढ़कर रक्षारेखा खींचे-

'मामभिरक्षय रघुकुल नायक।

धृतवर चाप रुचिर कर सायक।।'


(4) भगवान राम की शरण प्राप्ति हेतु-


'सुनि प्रभु वचन हरष हनुमाना।

सरनागत बच्छल भगवाना।।'


(5) विपत्ति नाश के लिए-


'राजीव नयन धरें धनु सायक।

भगत बिपति भंजन सुखदायक।।'


(6) रोग तथा उपद्रवों की शांति हेतु-


'दैहिक दैविक भौतिक तापा।

राम राज नहिं काहुहिं ब्यापा।।'


(7) आजीविका प्राप्ति या वृद्धि हेतु-


'बिस्व भरन पोषन कर जोई।

ताकर नाम भरत अस होई।।'


(8) विद्या प्राप्ति के लिए-


'गुरु गृह गए पढ़न रघुराई।

अल्पकाल विद्या सब आई।।'


(9) संपत्ति प्राप्ति के लिए-

'जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं।

सुख संपत्ति नानाविधि पावहिं।।'


(10) शत्रु नाश के लिए-


'बयरू न कर काहू सन कोई।

रामप्रताप विषमता खोई।।'


आवश्यकता के अनुरूप कोई मंत्र लेकर एक माला जपें तथा एक माला का हवन करें। जप के पहले श्री हनुमान चालीसा का पाठ कर लें तो शुभ रहेगा। जब तक कार्य पूरा न हो, तब तक एक माला (तुलसी की) नित्य जपें। यदि सम्पुट में इनका प्रयोग करें तो शीघ्र तथा निश्चित कार्यसिद्धि होगी। नवरात्रि में एक दिन सुंदरकांड अवश्य करें।

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Shri Krishna ke 108 Naam With Meaning - भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम और उनके अर्थ

Shri Krishna ke 108 Naam With Meaning


सौभाग्य, ऐश्वर्य, यश, कीर्ति, पराक्रम और अपार वैभव के लिए भगवान श्रीकृष्ण के नामों का जाप किया जाता है।

भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम और उनके अर्थ


1. अचला : भगवान।

2. अच्युत : अचूक प्रभु या जिसने कभी भूल न की हो।

3. अद्भुतह : अद्भुत प्रभु।

4. आदिदेव : देवताओं के स्वामी।

5. अदित्या : देवी अदिति के पुत्र।

6. अजन्मा : जिनकी शक्ति असीम और अनंत हो।

7. अजया : जीवन और मृत्यु के विजेता।

8. अक्षरा : अविनाशी प्रभु।

9. अमृत : अमृत जैसा स्वरूप वाले।

10. अनादिह : सर्वप्रथम हैं जो।

11. आनंद सागर : कृपा करने वाले।

12. अनंता : अंतहीन देव।

13. अनंतजीत : हमेशा विजयी होने वाले।

14. अनया : जिनका कोई स्वामी न हो।

15. अनिरुद्धा : जिनका अवरोध न किया जा सके।

16. अपराजित : जिन्हें हराया न जा सके।

17. अव्युक्ता : माणभ की तरह स्पष्ट।

18. बाल गोपाल : भगवान कृष्ण का बाल रूप।

19. बलि : सर्वशक्तिमान।

20. चतुर्भुज : चार भुजाओं वाले प्रभु।

21. दानवेंद्रो : वरदान देने वाले।

22. दयालु : करुणा के भंडार।

23. दयानिधि : सब पर दया करने वाले।

24. देवाधिदेव : देवों के देव।

25. देवकीनंदन : देवकी के लाल (पुत्र)।

26. देवेश : ईश्वरों के भी ईश्वर।

27. धर्माध्यक्ष : धर्म के स्वामी।

28. द्वारकाधीश : द्वारका के अधिपति।

29. गोपाल : ग्वालों के साथ खेलने वाले।

30. गोपालप्रिया : ग्वालों के प्रिय।

31. गोविंदा : गाय, प्रकृति, भूमि को चाहने वाले।

32. ज्ञानेश्वर : ज्ञान के भगवान।

33. हरि : प्रकृति के देवता।

34. हिरण्यगर्भा : सबसे शक्तिशाली प्रजापति।

35. ऋषिकेश : सभी इन्द्रियों के दाता।

36. जगद्गुरु : ब्रह्मांड के गुरु। 

37. जगदीशा : सभी के रक्षक।

38. जगन्नाथ : ब्रह्मांड के ईश्वर।

39. जनार्धना : सभी को वरदान देने वाले।

40. जयंतह : सभी दुश्मनों को पराजित करने वाले।

41. ज्योतिरादित्या : जिनमें सूर्य की चमक है।

42. कमलनाथ : देवी लक्ष्मी के प्रभु। 

43. कमलनयन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।

44. कामसांतक : कंस का वध करने वाले।

45. कंजलोचन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।

46. केशव : लंबे, काले उलझा ताले जिसने। 

47. कृष्ण : सांवले रंग वाले।

48. लक्ष्मीकांत : देवी लक्ष्मी के देवता। 

49. लोकाध्यक्ष : तीनों लोक के स्वामी।

50. मदन : प्रेम के प्रतीक।

51. माधव : ज्ञान के भंडार।

52. मधुसूदन : मधु-दानवों का वध करने वाले।

53. महेन्द्र : इन्द्र के स्वामी।

54. मनमोहन : सबका मन मोह लेने वाले।

55. मनोहर : बहुत ही सुंदर रूप-रंग वाले प्रभु।

56. मयूर : मुकुट पर मोरपंख धारण करने वाले भगवान।

57. मोहन : सभी को आकर्षित करने वाले।

58. मुरली : बांसुरी बजाने वाले प्रभु।

59. मुरलीधर : मुरली धारण करने वाले।

60. मुरली मनोहर : मुरली बजाकर मोहने वाले।

61. नंदगोपाल : नंद बाबा के पुत्र।

62. नारायन : सबको शरण में लेने वाले।

63. निरंजन : सर्वोत्तम।

64. निर्गुण : जिनमें कोई अवगुण नहीं।

65. पद्महस्ता : जिनके कमल की तरह हाथ हैं।

66. पद्मनाभ : जिनकी कमल के आकार की नाभि हो।

67. परब्रह्मन : परम सत्य।

68. परमात्मा : सभी प्राणियों के प्रभु।

69. परम पुरुष : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले।

70. पार्थसारथी : अर्जुन के सारथी।

71. प्रजापति : सभी प्राणियों के नाथ।

72. पुण्य : निर्मल व्यक्तित्व।

73. पुरुषोत्तम : उत्तम पुरुष।

74. रविलोचन : सूर्य जिनका नेत्र है।

75. सहस्राकाश : हजार आंख वाले प्रभु।

76. सहस्रजीत : हजारों को जीतने वाले।

77. सहस्रपात : जिनके हजारों पैर हों।

78. साक्षी : समस्त देवों के गवाह।

79. सनातन : जिनका कभी अंत न हो।

80. सर्वजन : सब कुछ जानने वाले।

81. सर्वपालक : सभी का पालन करने वाले।

82. सर्वेश्वर : समस्त देवों से ऊंचे।

83. सत्य वचन : सत्य कहने वाले।

84. सत्यव्त : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले देव।

85. शंतह : शांत भाव वाले।

86. श्रेष्ठ : महान।

87. श्रीकांत : अद्भुत सौंदर्य के स्वामी।

88. श्याम : जिनका रंग सांवला हो।

89. श्यामसुंदर : सांवले रंग में भी सुंदर दिखने वाले।

90. सुदर्शन : रूपवान।

91. सुमेध : सर्वज्ञानी।

92. सुरेशम : सभी जीव-जंतुओं के देव।

93. स्वर्गपति : स्वर्ग के राजा।

94. त्रिविक्रमा : तीनों लोकों के विजेता।

95. उपेन्द्र : इन्द्र के भाई।

96. वैकुंठनाथ : स्वर्ग के रहने वाले।

97. वर्धमानह : जिनका कोई आकार न हो।

98. वासुदेव : सभी जगह विद्यमान रहने वाले।

99. विष्णु : भगवान विष्णु के स्वरूप।

100. विश्वदक्शिनह : निपुण और कुशल।

101. विश्वकर्मा : ब्रह्मांड के निर्माता।

102. विश्वमूर्ति : पूरे ब्रह्मांड का रूप।

103. विश्वरूपा : ब्रह्मांड हित के लिए रूप धारण करने वाले।

104. विश्वात्मा : ब्रह्मांड की आत्मा।

105. वृषपर्व : धर्म के भगवान।

106. यदवेंद्रा : यादव वंश के मुखिया।

107. योगि : प्रमुख गुरु।

108. योगिनाम्पति : योगियों के स्वामी।

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Neel Saraswati Stotra - शत्रुओं से परेशान हैं तो पढ़ें नील सरस्वती स्तोत्र

Neel Saraswati Stotra



 * शत्रुओं से परेशान हैं तो पढ़ें नील सरस्वती स्तोत्र  

हर व्यक्ति की जिंदगी में कोई ना कोई शत्रु अवश्य होता है। कोई शत्रु प्रत्यक्ष रूप से तो कोई अप्रत्यक्ष रूप से परेशान करता रहता है और हम परेशान हो जाते हैं। हर कोई चाहता है कि उसे उसके शत्रु से छुटकारा मिले तथा जीवन में सबकुछ अच्छा हो, लेकिन ऐसा होता नहीं है। 

अगर आप भी अपने शत्रु के कारण परेशानियों का सामना कर रहे है तो आपके लिए यह नील सरस्वती स्तोत्र बहुत ही मददगार साबित होगा, इसके पाठ से हम अपने शत्रु पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। यह स्तोत्र हमारे शत्रुओं का नाश करने में सक्षम है। इस स्तोत्र को जो व्यक्ति अष्टमी, नवमी तथा चतुर्दशी के दिन अथवा प्रतिदिन इसका पाठ करता है उसके सभी शत्रुओं का नाश हो जाता है। आइए पढ़ें पवित्र नील सरस्वती स्तोत्र

नील सरस्वती स्तोत्र

 

घोररूपे महारावे सर्वशत्रुभयंकरि।

भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।1।।

 

ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते।

जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।2।।

 

जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि।

द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।3।।

 

सौम्यक्रोधधरे रूपे चण्डरूपे नमोSस्तु ते।

सृष्टिरूपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणागतम्।।4।।

 

जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला।

मूढ़तां हर मे देवि त्राहि मां शरणागतम्।।5।।

 

वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नम:।

उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम्।।6।।

 

बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे।

मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणागतम्।।7।।

 

इन्द्रादिविलसदद्वन्द्ववन्दिते करुणामयि।

तारे ताराधिनाथास्ये त्राहि मां शरणागतम्।।8।।

 

अष्टभ्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां य: पठेन्नर:।

षण्मासै: सिद्धिमाप्नोति नात्र कार्या विचारणा।।9।।

 

मोक्षार्थी लभते मोक्षं धनार्थी लभते धनम्।

विद्यार्थी लभते विद्यां विद्यां तर्कव्याकरणादिकम।।10।।

 

इदं स्तोत्रं पठेद्यस्तु सततं श्रद्धयाSन्वित:।

तस्य शत्रु: क्षयं याति महाप्रज्ञा प्रजायते।।11।।

 

पीडायां वापि संग्रामे जाड्ये दाने तथा भये।

य इदं पठति स्तोत्रं शुभं तस्य न संशय:।।12।।

 

इति प्रणम्य स्तुत्वा च योनिमुद्रां प्रदर्शयेत।।13।।

 

।।इति नीलसरस्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।

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Maa Durga ke 32 Naam - नवरात्र में जरूर पढ़े माँ दुर्गा के 32 नाम मिलती है सुख और शांति

Maa Durga ke 32 Naam


दानव महिषासुर के वध से प्रसन्न और निर्भय हो गए त्रिदेवों सहित देवताओं ने प्रसन्न भगवती से ऐसे किसी अमोघ उपाय की याचना की, जो सरल हो और कठिन से कठिन विपत्ति से छुड़ाने वाला हो। 'हे देवी! यदि वह उपाय गोपनीय हो तब भी कृपा कर हमें कहें। ' मां भगवती ने अपने ही बत्तीस नामों की माला के एक अद्भुत गोपनीय रहस्यमय किंतु चमत्कारी जप का उपदेश दिया जिसके करने से घोर से घोर विपत्ति, राज्यभय या दारुण विपत्ति से ग्रस्त मनुष्य भी भयमुक्त एवं सुखी हो जाता है।

मां भगवती ने अपने ही बत्तीस नामों की माला के एक अद्भुत गोपनीय रहस्यमय किंतु चमत्कारी जप का उपदेश दिया जिसके करने से घोर से घोर विपत्ति, राज्यभय या दारुण विपत्ति से ग्रस्त मनुष्य भी भयमुक्त एवं सुखी हो जाता है। मां दुर्गा को अपने यह 32 नाम अति प्रिय हैं। इन्हें सुनकर वे पुलकित हो जाती हैं।


देहशुद्धि के बाद कुश या कम्बल के आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर की तरफ मुंह करके घी के दीपक के सामने इन नामों की 5/ 11/ 21 माला नौ दिन करनी है और जगत माता से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की याचना करनी है।

मां दुर्गा के 32 नाम

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ॐ दुर्गा,

दुर्गतिशमनी,

दुर्गाद्विनिवारिणी,

दुर्गमच्छेदनी,

दुर्गसाधिनी,

दुर्गनाशिनी,

दुर्गतोद्धारिणी,

दुर्गनिहन्त्री

दुर्गमापहा,

दुर्गमज्ञानदा,

दुर्गदैत्यलोकदवानला,

दुर्गमा,

दुर्गमालोका,

दुर्गमात्मस्वरुपिणी,

दुर्गमार्गप्रदा,

दुर्गम विद्या,

दुर्गमाश्रिता,

दुर्गमज्ञान संस्थाना,

दुर्गमध्यान भासिनी,

दुर्गमोहा, दुर्गमगा,

दुर्गमार्थस्वरुपिणी,

दुर्गमासुर संहंत्रि,

दुर्गमायुध धारिणी,

दुर्गमांगी,

दुर्गमता,

दुर्गम्या,

दुर्गमेश्वरी,

दुर्गभीमा,

दुर्गभामा,

दुर्गमो,

दुर्गोद्धारिणी।

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