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मंगलवार, 12 अक्तूबर 2021

Shri Tripura Sundari Stotram in Sanskrit - श्री त्रिपुरसुन्दरी स्तोत्रम्


Shri Tripura Sundari Stotram in Sanskrit

श्री त्रिपुरसुन्दरी स्तोत्रम्


कदंबवनचारिणीं मुनिकदम्बकादंविनीं,

नितंबजितभूधरां सुरनितंबिनीसेविताम् |

नवंबुरुहलोचनामभिनवांबुदश्यामलां,

त्रिलोचनकुटुम्बिनीं त्रिपुरसुंदरीमाश्रये ॥|1|


कदंबवनवासिनीं कनकवल्लकीधारिणीं,

महार्हमणिहारिणीं मुखसमुल्लसद्वारुणींम् |

दया विभव कारिणी विशद लोचनी चारिणी,

त्रिलोचन कुटुम्बिनी त्रिपुर सुंदरी माश्रये ॥|2|


कदंबवनशालया कुचभरोल्लसन्मालया,

कुचोपमितशैलया गुरुकृपालसद्वेलया |

मदारुणकपोलया मधुरगीतवाचालया ,

कयापि घननीलया कवचिता वयं लीलया ॥|3|


कदंबवनमध्यगां कनकमंडलोपस्थितां,

षडंबरुहवासिनीं सततसिद्धसौदामिनीम् |

विडंवितजपारुचिं विकचचंद्रचूडामणिं ,

त्रिलोचनकुटुंबिनीं त्रिपुरसुंदरीमाश्रये ॥|4|


कुचांचितविपंचिकां कुटिलकुंतलालंकृतां ,

कुशेशयनिवासिनीं कुटिलचित्तविद्वेषिणीम् |

मदारुणविलोचनां मनसिजारिसंमोहिनीं ,

मतंगमुनिकन्यकां मधुरभाषिणीमाश्रये ॥|5|


स्मरेत्प्रथमपुष्प्णीं रुधिरबिन्दुनीलांबरां,

गृहीतमधुपत्रिकां मधुविघूर्णनेत्रांचलाम्‌ |

घनस्तनभरोन्नतां गलितचूलिकां श्यामलां,

त्रिलोचनकुटंबिनीं त्रिपुरसुंदरीमाश्रये ॥|6|


सकुंकुमविलेपनामलकचुंबिकस्तूरिकां ,

समंदहसितेक्षणां सशरचापपाशांकुशाम् |

असेष जनमोहिनी मरूण माल्य भुषाम्बरा,

जपाकुशुम भाशुरां जपविधौ स्मराम्यम्बिकाम ॥|7|


पुरम्दरपुरंध्रिकां चिकुरबंधसैरंध्रिकां ,

पितामहपतिव्रतां पटुपटीरचर्चारताम्‌ |

मुकुंदरमणीं मणिलसदलंक्रियाकारिणीं,

भजामि भुवनांबिकां सुरवधूटिकाचेटिकाम् ॥|8|


इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यश्रीमच्छंकराचार्य विरचितं त्रिपुरसुन्दरीस्तोत्रं संपूर्णम् ।

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